श्रीगणेशाची आरती

सुखकर्ता दु:खहर्ता वार्ता विघ्नाची।।

नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।।

सर्वांगीं सुंदर उटि शेंदुराची।।

कंठीं झळके माळ मुक्ताफळांची।। १ ।।

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ओ श्रीमंगलमूर्ती।।

दर्शनमात्रें स्मरनेमात्रें मनकामना पुरती ।। धृ.।।

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।

चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा।।

हिरेजडित मुगुट शोभतो बरा।।

रुणझुणती नूपुरें चरणीं घागरिया।। जय.।। २ ।।

लंबोदर पितांबर फणिवरबंधना।।

सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।।

दास रामाचा वाट पाहे सदना।।

संकष्टीं पावावें निर्वाणीं रक्षावें सुरवरवंदना।।

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ओ श्रीमंगलमूर्ती ।। दर्शन.।। ३ ।।

~ by manatala on ऑक्टोबर 23, 2007.

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